अयोध्या। राम मंदिर के बेहतर और बड़े स्तर पर प्रबंधन के लिए पहले CEO की तलाश अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। तीन सदस्यीय चयन समिति ने करीब तीन सप्ताह की कड़ी प्रक्रिया के बाद तीन नामों को अंतिम रूप देकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया है। इन तीन नामों में से ही राम मंदिर के पहले CEO का चयन किया जाएगा। इसके लिए दो सितंबर को ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक होनी है। माना जा रहा है कि बैठक में CEO के नाम का ऐलान किया जा सकता है।राम मंदिर के CEO पद के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आए कि चयन समिति को उम्मीदवारों की कई चरणों में छंटनी करनी पड़ी। समिति ने योग्यता, अनुभव, सोच और मंदिर के बड़े स्तर पर प्रबंधन की समझ जैसे अलग-अलग मानकों के आधार पर उम्मीदवारों को परखा। आखिर में 5500 से ज्यादा आवेदनों में से तीन नाम सामने आए।
तीन सदस्यीय समिति ने संभाली चयन की जिम्मेदारी
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई थी। इसमें जस्टिस प्रमोद कोहली, चतुर्वेदी जी और सुरेश हावरे को जिम्मेदारी दी गई। चयन समिति के सदस्य जस्टिस प्रमोद कोहली के मुताबिक ट्रस्ट ने छह तारीख को CEO की तलाश के लिए सर्च कमेटी बनाने का फैसला किया था। आठ तारीख को तीनों सदस्यों को नियुक्ति का पत्र मिला और 11 तारीख को पहली बैठक हुई। पहली बैठक में CEO पद के लिए पात्रता तय की गई। इसके बाद योग्य और इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे गए। आवेदन करने की अंतिम तारीख 18 तारीख रखी गई थी। इस दौरान समिति को 5585 आवेदन प्राप्त हुए। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की जांच करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।समिति ने 19 तारीख को बैठक कर आगे की प्रक्रिया तय की। इसके लिए एक गूगल फॉर्म तैयार किया गया। इसमें अलग-अलग श्रेणियां बनाई गईं और उम्मीदवारों की योग्यता के हिसाब से अंक तय किए गए। कुल 600 अंकों का मूल्यांकन तैयार किया गया। आवेदन करने वालों में से 3577 लोगों ने इस गूगल फॉर्म का जवाब दिया।
600 में 470 अंक वालों तक पहुंची चयन प्रक्रिया
गूगल फॉर्म में उम्मीदवारों की योग्यता और दूसरे मानकों के आधार पर अंक दिए गए। समिति ने तय किया कि आगे की प्रक्रिया में उन्हीं लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनके अंक तय सीमा से ऊपर होंगे। इस छंटनी के बाद 600 में 470 या उससे ज्यादा अंक पाने वाले 108 उम्मीदवार सामने आए। इन 108 उम्मीदवारों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की गई। यह प्रक्रिया करीब चार दिन चली। समिति ने उम्मीदवारों की योग्यता के साथ-साथ उनकी सोच, काम करने की क्षमता और बड़े धार्मिक संस्थान के प्रबंधन को लेकर उनकी समझ को भी परखा।वीडियो बातचीत के बाद उम्मीदवारों की संख्या और कम की गई। समिति ने 17 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया। इन उम्मीदवारों को अलग-अलग ग्रेड में भी बांटा गया। इसके बाद इन सभी को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने बातचीत करने का फैसला लिया गया।
अयोध्या में 16 उम्मीदवारों का आमने-सामने इंटरव्यू
17 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को अयोध्या धाम में फिजिकल इंटरैक्शन के लिए बुलाया गया था। हालांकि एक उम्मीदवार पारिवारिक कारणों से अयोध्या नहीं पहुंच सका। इसके बाद 16 उम्मीदवारों का दो दिन तक आमने-सामने इंटरव्यू हुआ। 11 और 12 तारीख को चयन समिति ने उम्मीदवारों के साथ लंबी बातचीत की। इस दौरान अलग-अलग पहलुओं पर उन्हें परखा गया। समिति ने पहले से तय किए गए मानकों के आधार पर अंक दिए। उम्मीदवारों की कार्यक्षमता, दृष्टिकोण, समर्पण और समस्याओं को समझने की क्षमता को भी देखा गया। चयन समिति के मुताबिक उसका उद्देश्य ऐसे लोगों की तलाश करना था, जो केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले न हों, बल्कि राम मंदिर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के भविष्य के प्रबंधन की जरूरतों को भी समझते हों।आमने-सामने हुई बातचीत के बाद समिति ने तीन उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया। इन तीनों नामों को बंद लिफाफे में राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। अब अंतिम फैसला राम मंदिर ट्रस्ट को करना है। ट्रस्ट की बैठक में तीनों नामों पर विचार किया जाएगा और इनमें से किसी एक को राम मंदिर का पहला CEO बनाया जा सकता है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए एक योग्य CEO की जरूरत है। उन्होंने चयन समिति के तीनों सदस्यों का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने दिन-रात मेहनत कर पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।अब सभी की नजरें दो सितंबर की ट्रस्ट की बैठक पर हैं। इसी बैठक में यह साफ हो सकता है कि 5585 आवेदनों, कई चरणों की छंटनी और इंटरव्यू के बाद चुने गए तीन नामों में से राम मंदिर की कमान किसे सौंपी जाएगी
