पश्चिम एशिया में चल रहे बड़े युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर (युद्धविराम) हुआ है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। जहां एक तरफ दोनों देश बातचीत की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में हमले जारी रखे हैं, जिससे स्थिति फिर से बिगड़ती दिख रही है।करीब 40 दिन से चल रहे इस युद्ध में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और कई देशों पर इसका असर पड़ा है। अब इस सीजफायर को शांति की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं।
सीजफायर कैसे हुआ और आगे क्या होगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया है। यह समझौतापाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ है। शर्त यह रखी गई कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है) को खोल देगा और अमेरिका उस पर हमले रोक देगा। अब 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बड़ी बैठक होने वाली है। इस बैठक में कोशिश होगी कि युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का रास्ता निकले।
लेकिन दिक्कत यह है कि इस सीजफायर को लेकर सभी देशों की राय एक जैसी नहीं है। ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि इसमें लेबनान भी शामिल है, जबकि अमेरिका और इजरायल कह रहे हैं कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है।
लेबनान में हमले जारी, सीजफायर पर खतरा
सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में जोरदार हवाई हमले किए। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और यह सीजफायर उस पर लागू नहीं होता। वहीं हिजबुल्लाह और ईरान का कहना है कि अगर हमले नहीं रुके तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी बीच ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले बंद नहीं हुए तो वह सख्त कदम उठा सकता है।
दुनिया पर असर और आगे का खतरा
इस पूरे संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध वाले देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल के दाम बढ़ गए हैं और व्यापार पर भी असर पड़ा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण।
सीजफायर के बावजूद हमले जारी रहने से साफ है कि यह शांति बहुत नाजुक है। अगर जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो यह युद्ध फिर से बड़े स्तर पर भड़क सकता है।
