अमेरिका का नया 10% टैरिफ,सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बड़ा बदलाव भारत के व्यापार पर क्या पड़ेगा असर, आसान भाषा में समझिए

अमेरिका में व्यापार नियमों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। वहां की अदालत के एक अहम फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर से आने वाले सामान पर नया 10% आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला सीधे तौर पर भारत जैसे देशों के व्यापार पर असर डाल सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि फिलहाल भारतीय निर्यातकों को इससे कुछ राहत भी मिली है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

नया टैरिफ नियम क्या है?

अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले ट्रंप प्रशासन के कुछ टैरिफ फैसलों को खारिज कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने नए नियमों के साथ वापसी की है। राष्ट्रपति ने 20 फरवरी को घोषणा की कि अब अमेरिका में आने वाले लगभग सभी आयातित सामान पर 10% का अस्थायी सरचार्ज लगाया जाएगा।
यह नया शुल्क 24 फरवरी 2026 से लागू होगा और करीब 150 दिनों तक लागू रहने की बात कही गई है। खास बात यह है कि यह 10% शुल्क पहले से लग रहे आयात शुल्क (एमएफएन टैरिफ) के ऊपर से लिया जाएगा।
अमेरिकी सरकार के मुताबिक यह कदम घरेलू उद्योग को बचाने और व्यापार घाटा कम करने के लिए उठाया गया है। इस फैसले की जानकारी व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक तौर पर दी गई।

भारत के लिए राहत क्यों मानी जा रही है?

पहले अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% तक टैरिफ लगा दिया था। रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर अतिरिक्त 25% जुर्माना जोड़कर यह प्रभावी शुल्क 50% तक पहुंच गया था। बाद में कुछ राहत मिली और शुल्क फिर 25% रह गया।

अब नए फैसले के बाद भारत पर प्रभावी शुल्क घटकर 10% रह जाएगा, इसलिए इसे भारतीय कारोबारियों के लिए राहत माना जा रहा है। खासकर कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल और छोटे उद्योगों को इससे फायदा हो सकता है।

हालांकि पूरी राहत नहीं है। स्टील, एल्युमीनियम और तांबा जैसे धातु उत्पादों पर पहले वाला भारी शुल्क जारी रहेगा। कुछ ऑटो पार्ट्स पर भी 25% तक शुल्क बना रहेगा। इसलिए बड़े उद्योगों की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

किन सामानों को छूट मिली है?

अमेरिका ने अपनी जरूरतों को देखते हुए कुछ जरूरी उत्पादों को इस नए टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें दवाइयां और फार्मा सामग्री, ऊर्जा से जुड़े उत्पाद, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और जरूरी कृषि उत्पाद शामिल हैं।

इसका मतलब है कि भारतीय फार्मा सेक्टर पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, जो भारत के निर्यात का मजबूत हिस्सा माना जाता है।

भारत-अमेरिका व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं?
अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। साल 2024-25 में दोनों देशों के बीच लगभग 186 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। इसमें भारत को करीब 41 अरब डॉलर का फायदा (ट्रेड सरप्लस) हुआ। सेवाओं को मिलाकर यह फायदा 44 अरब डॉलर से ज्यादा बताया जाता है।

अमेरिका का आरोप है कि भारत अमेरिकी सामान पर ज्यादा टैक्स लगाता है, इसलिए संतुलन बनाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं।

आगे व्यापार समझौते का क्या होगा?

दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की टीम 23 फरवरी से वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करने वाली है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीने समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं और अप्रैल से इसे लागू किया जा सकता है।

लेकिन व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव का कहना है कि जब अमेरिका ने सभी देशों के लिए टैरिफ 10% कर दिया है, तो भारत को भी यह देखना चाहिए कि समझौते से असली फायदा कितना होगा।

कुल मिलाकर क्या समझें?

सीधी बात करें तो अभी के लिए भारत को राहत मिली है क्योंकि शुल्क 25% से घटकर 10% हो गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को थोड़ी सांस लेने का मौका मिलेगा। लेकिन कुछ बड़े सेक्टरों पर भारी टैक्स जारी है और यह व्यवस्था सिर्फ 150 दिनों के लिए है, इसलिए भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत ही तय करेगी कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते आगे मजबूत होंगे या नई चुनौतियां सामने आएंगी।