बांग्लादेश चुनाव आज मतदान से नतीजों तक पूरा हाल, हिंसा के बीच कैसी है तैयारी करीब डेढ़ साल बाद हो रहे आम चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर जानिए कौन वोट देगा, कैसे होंगे चुनाव और क्या हैं बड़े मुद्दे 

करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद बांग्लादेश में आम संसदीय चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों पर सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि भारत, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की भी कड़ी नजर बनी हुई है। वजह है देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का देश छोड़ना, धार्मिक और राजनीतिक हिंसा में बढ़ोतरी और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवाल।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हालात तेजी से बदले हैं। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस हैं, जिन पर विपक्ष को दबाने और बड़ी पार्टियों को चुनाव से बाहर रखने के आरोप लग रहे हैं। सबसे बड़ा विवाद यह है कि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को ही चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे माहौल में हो रहे चुनाव को लेकर जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों सतर्क हैं।

मतदान कैसे होगा, बैलेट या ईवीएम?

बांग्लादेश निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक तय किया गया है। इस बार वोट डालने के लिए एक घंटा ज्यादा समय दिया गया है। इसकी वजह यह है कि मतदाताओं को सांसद चुनने के साथ-साथ एक संवैधानिक जनमत संग्रह, जिसे “जुलाई चार्टर” कहा जा रहा है, उस पर भी वोट देना है। इसके जरिए अंतरिम सरकार संविधान में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है।

इस चुनाव में मतदान ईवीएम से नहीं, बल्कि बैलेट पेपर के जरिए कराया जा रहा है। खास बात यह है कि पहली बार पोस्टल बैलेट की सुविधा भी दी गई है, जिससे विदेशों में रह रहे बांग्लादेशी नागरिक भी वोट डाल सकें। इससे पहले प्रवासी नागरिकों को यह अधिकार नहीं मिल पाता था।

नतीजे कब आएंगे?

मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू कर दी जाएगी। बांग्लादेश में कुल 300 संसदीय सीटें हैं, जिनमें से 299 सीटों पर सीधे चुनाव हो रहे हैं। एक सीट पर अलग व्यवस्था है। इतने बड़े स्तर पर वोटों की गिनती होने के कारण नतीजों की आधिकारिक घोषणा में थोड़ा वक्त लग सकता है।

खबरों के मुताबिक, मतगणना के शुरुआती रुझान भारतीय समय के अनुसार आधी रात से आने शुरू हो सकते हैं। चुनाव आयोग की तरफ से अंतिम और औपचारिक नतीजों की घोषणा 13 फरवरी को किए जाने की संभावना है। फिलहाल पूरे देश में मतदान की प्रक्रिया चल रही है।

 कितनी पार्टियां और कितने उम्मीदवार मैदान में?

इस चुनाव में कुल 59 पंजीकृत राजनीतिक दल हिस्सा ले रहे हैं। प्रमुख दलों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाला 10 दलों का गठबंधन शामिल है। इसके अलावा नेशनल सिटीजन पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन भी चुनाव लड़ रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव से बाहर कर दिया गया है, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा है। इसके अलावा जातीय पार्टी के दोनों गुट, कुछ वामपंथी दल और अमार बांग्लादेश पार्टी भी मैदान में हैं।

कुल 1,981 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें करीब 1,700 उम्मीदवार राजनीतिक दलों से हैं और 249 निर्दलीय उम्मीदवार हैं। महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। सिर्फ 76 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जो कुल उम्मीदवारों का 4 फीसदी से भी कम है।

मतदाता कितने और कौन वोट डाल सकता है?

इस चुनाव में कुल करीब 12.77 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग 6.48 करोड़ है, जबकि महिला मतदाता करीब 6.28 करोड़ हैं। यानी महिला मतदाता लगभग बराबरी पर हैं, लेकिन उम्मीदवारों में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम है।

युवा मतदाता इस चुनाव की बड़ी ताकत हैं। करीब 5 करोड़ 60 लाख मतदाताओं की उम्र 18 से 37 साल के बीच है। इनमें से 45.70 लाख युवा पहली बार वोट डाल रहे हैं।

वोट वही बांग्लादेशी नागरिक डाल सकता है, जिसकी उम्र 31 अक्टूबर 2025 तक 18 साल या उससे ज्यादा है और जिसका नाम अंतिम मतदाता सूची में दर्ज है। मानसिक रूप से स्वस्थ होना और संबंधित क्षेत्र का निवासी होना भी जरूरी है। पहली बार करीब डेढ़ करोड़ प्रवासी बांग्लादेशियों को पोस्टल बैलेट से वोट डालने का मौका मिला है।

हिंसा और सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश में धार्मिक और राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों के आरोप भी लगे हैं। इसे देखते हुए चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस, अर्धसैनिक बल और सेना की तैनाती की गई है।

इन चुनावों में महंगाई, बेरोजगारी, संविधान में बदलाव, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतंत्र की मजबूती जैसे मुद्दे सबसे अहम हैं। अब देखना यह होगा कि बांग्लादेश की जनता किसे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपती है और क्या यह चुनाव देश में स्थिरता ला पाता है या नहीं।