बरेली में लाल निशान से दहशत, बरेली में मचा हड़कंप,300 घरों और 50 दुकानों पर चला नगर निगम का डंडा,सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उजड़ने का डर, लोग और व्यापारी परेशान

बरेली में सड़क चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम की कार्रवाई से आम लोग और व्यापारी दोनों परेशान नजर आ रहे हैं। सीबीगंज क्षेत्र के खलीलपुर रोड पर नगर निगम की टीम ने करीब 300 घरों पर लाल निशान लगाकर नोटिस थमा दिए हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है।
नगर निगम का कहना है कि ये मकान सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हैं, इसलिए इन्हें अवैध कब्जा मानते हुए चिन्हित किया गया है। टीम नोटिस देकर मौके से लौट गई, लेकिन बुलडोजर की चेतावनी से लोग सहमे हुए हैं।

100 साल पुराने घर, फिर भी अवैध?

स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके मकान कोई नए नहीं हैं, बल्कि करीब 80 से 100 साल पुराने हैं। लोगों का दावा है कि सड़क पहले से ही करीब 12 मीटर चौड़ी है और किनारे नाला भी बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सड़क को और कितना चौड़ा किया जाएगा।
महिलाओं ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने मजदूरी करके ये घर बनाए हैं। अगर बुलडोजर चला तो उनके पास सिर छुपाने की भी जगह नहीं बचेगी। कई परिवारों ने नगर निगम पर भेदभाव और पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पीड़ित परिवारों ने साफ कहा कि अगर मकान हटाए जाते हैं तो उन्हें मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।

व्यापारियों में भी भारी नाराजगी

इसी तरह सीएम ग्रिड योजना के तहत कोहाड़ापीर से धर्मकांटा चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई चल रही है। यहां नगर निगम की टीम ने 50 से 60 दुकानों पर लाल निशान लगा दिए हैं।
दुकानदारों का आरोप है कि पैमाइश एक समान नहीं है। कहीं 1.5 मीटर तो कहीं 2.5 मीटर तक कब्जा बताया गया है। इससे व्यापारी असमंजस में हैं। व्यापारियों ने बैठक कर विरोध जताया और कहा कि पहले कोरोना, फिर महादेव सेतु निर्माण से व्यापार चौपट हुआ, अब दुकानें टूटीं तो रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी।कुछ छोटे दुकानदारों ने बड़े व्यापारियों को बचाने और सिर्फ छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया है।

अधिकारी का बयान

नगर निगम के ई0 पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने कहा,खलीलपुर रोड पर करीब 300 मकानों को अवैध रूप से कब्जा कर बनाए जाने के चलते चिन्हित किया गया है। सभी को नोटिस दे दिए गए हैं और लाल निशान लगाए गए हैं। यह सड़क है और इसका चौड़ीकरण होना है। अगर लोग खुद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो तो बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी, और उसका खर्च भी संबंधित लोगों से ही वसूला जाएगा।