रक्षा, ऊर्जा और आतंकवाद पर एकजुट हुए दोनों देश
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रिश्तों ने एक बार फिर नई ऊंचाई छू ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई अहम बातचीत में यह तय हुआ कि दोनों देश अगले छह साल में आपसी व्यापार को दोगुना करेंगे। लक्ष्य रखा गया है कि साल 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा।
सोमवार को राष्ट्रपति नाहयान के भारत दौरे के दौरान दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर यह वार्ता हुई। बातचीत में व्यापार के साथ-साथ रक्षा, ऊर्जा, असैन्य परमाणु सहयोग और आतंकवाद जैसे अहम मुद्दों पर भी सहमति बनी। इस दौरान भारत और यूएई के बीच कुल सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
फिलहाल भारत और यूएई के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर से ज्यादा का हो चुका है। अब दोनों देशों ने इसे और तेज गति देने का फैसला किया है। खास तौर पर भारत के छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को फायदा पहुंचाने पर जोर दिया गया। इन उद्योगों के उत्पादों को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया के बाजारों तक आसान पहुंच देने पर सहमति बनी है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच 10 साल के लिए सालाना 5 लाख मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति का समझौता हुआ है। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थिरता मिलेगी और यूएई के साथ भरोसेमंद साझेदारी और मजबूत होगी।
रक्षा और आतंकवाद पर साझा रुख
वार्ता के दौरान भारत-यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क पर भी सहमति बनी। इसका मकसद सुरक्षा सहयोग को और गहरा करना है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं ने सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और कहा कि आतंकवाद से जुड़े अपराधियों, उन्हें समर्थन देने वालों और फंडिंग करने वालों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।
इसके अलावा यमन, गाजा और ईरान की स्थिति पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। मध्य पूर्व में चल रही अस्थिरता के बीच यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए राष्ट्रपति नाहयान का स्वागत खुद हवाईअड्डे पर किया। दोनों नेता एक ही गाड़ी में प्रधानमंत्री आवास तक गए। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति नाहयान की यात्रा भारत और यूएई की गहरी दोस्ती को दिखाती है।
करीब साढ़े तीन घंटे दिल्ली में रुकने के बाद राष्ट्रपति नाहयान स्वदेश रवाना हो गए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उन्हें हवाईअड्डे पर विदा किया। यह छोटी लेकिन बेहद अहम यात्रा भारत-यूएई संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ गई।
