बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंडविश्वविद्यालय में शनिवार को हुई , एलएलबी की परीक्षा उस समय विवादों में आ गई, जब छात्रों को प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल दिखे जो उनके पाठ्यक्रम से जुड़े ही नहीं थे। एलएलबी पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ एंड आईपीआर लिटिगेशन विषय की परीक्षा थी, लेकिन इसमें कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े सवाल पूछे गए। सवाल देखते ही छात्रों का सिर चकरा गया और कई परीक्षा केंद्रों पर हंगामा शुरू हो गया।
छात्रों का कहना था कि वे कानून की पढ़ाई कर रहे हैं, न कि कंप्यूटर की। प्रश्नपत्र में कुल 10 सवाल थे, जिनमें से पांच हल करने थे, लेकिन सात सवाल ऐसे थे जो सिलेबस से बाहर बताए गए। ऐसे में छात्रों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। परीक्षा कक्ष में बैठे कई छात्र तनाव में आ गए और तुरंत कक्ष निरीक्षकों को इस गड़बड़ी की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय ने दिया आश्वासन, तीन सवाल ही हल करने के निर्देश
स्थिति बिगड़ती देख परीक्षा केंद्रों से विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना दी गई। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से निर्देश जारी किए गए कि छात्र केवल वही तीन सवाल हल करें, जो पाठ्यक्रम से संबंधित हैं। साथ ही छात्रों को यह भी भरोसा दिलाया गया कि उनके साथ न्याय किया जाएगा और मूल्यांकन आंतरिक व मुख्य परीक्षा के अंकों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कहीं जाकर छात्र शांत हुए और परीक्षा पूरी की।
छात्रों में इस बात को लेकर अब भी असमंजस है कि जब 90 अंकों के पेपर में सिर्फ तीन सवाल हल कराए गए हैं, तो अंक किस तरह बांटे जाएंगे। आमतौर पर एक सवाल 18 अंकों का होता है, लेकिन अब छात्र अनुमान लगा रहे हैं कि शायद हर सवाल 30 अंकों का माना जाए। हालांकि, इस बारे में विश्वविद्यालय की ओर से कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के विधि विभाग के डीन डॉ. अमित सिंह ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट तीन दिन के भीतर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने में हुई इस तरह की लापरवाही गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने भी माना कि एलएलबी के प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल आने की शिकायत मिली है। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
छात्रों का कहना है कि इस तरह की गलतियां उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। वे पहले ही परीक्षा के दबाव में रहते हैं और ऊपर से ऐसी चूक मानसिक तनाव बढ़ा देती है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय के फैसले पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है।
