उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर हलचल तेज हो गई है। खबर है कि प्रदेश में लंबे समय से अटका कैबिनेट विस्तार अब 10 से 15 मई के बीच हो सकता है। इसे लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर चल चुका है और अब अंतिम फैसला कभी भी सामने आ सकता है।बताया जा रहा है कि दूसरे राज्यों में सरकार गठन और शपथ ग्रहण कार्यक्रम खत्म होने के बाद अब भाजपा का पूरा ध्यान यूपी पर आ गया है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है।
उम्रदराज मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरों की एंट्री तय
इस बार कैबिनेट विस्तार सिर्फ औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसमें बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार कुछ पुराने और उम्रदराज मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि उनकी जगह नए और युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा।इतना ही नहीं, कई मंत्रियों के कामकाज की भी समीक्षा की गई है। जिनका प्रदर्शन कमजोर रहा है, उनकी छुट्टी हो सकती है या उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है। वहीं खाली पड़े पदों को भी भरा जाएगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव सीधे-सीधे आगामी चुनाव की रणनीति से जुड़ा हुआ है। पार्टी चाहती है कि सरकार में नए जोश के साथ काम करने वाले लोग आएं और जनता के बीच बेहतर संदेश जाए।
जातीय समीकरण और सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका
कैबिनेट विस्तार में जातीय संतुलन का खास ध्यान रखा जाएगा। खबर है कि ओबीसी और दलित वर्ग को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इसके अलावा ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी कुछ नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। सिर्फ इतना ही नहीं, भाजपा अपने सहयोगी दलों को भी खुश रखने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी के एक-एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। इन नामों का फैसला संबंधित दलों के प्रमुख करेंगे।
दिल्ली से तय हो रहे नाम, अभी अंतिम मुहर बाकी
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले पर दिल्ली में पार्टी के बड़े नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लखनऊ में भी अप्रैल भर बैठकों का दौर चलता रहा, जिसमें कई नामों पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही सूची जारी हो सकती है। करीब एक दर्जन से ज्यादा नामों पर विचार चल रहा है और अंतिम सूची में कई चौंकाने वाले नाम भी शामिल हो सकते हैं।
2027 चुनाव की तैयारी का हिस्सा है यह बदलाव
दरअसल, यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ सरकार का बदलाव नहीं बल्कि 2027 के चुनाव की तैयारी का बड़ा कदम माना जा रहा है। पार्टी हर वर्ग को साधने और मजबूत संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।इसलिए इस बार का विस्तार साधारण नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि किन नेताओं की किस्मत चमकती है और किसकी कुर्सी चली जाती है।
