ईरान में हिंसा और सियासी टकराव, 3,000 से ज्यादा मौतों का दावा,खामनेई ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार

ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। सरकारी दावों के मुताबिक अब तक मरने वालों की संख्या 3,000 के पार पहुंच चुकी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इतने बड़े पैमाने पर हुई मौतों का जिक्र किया है। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान में विरोध प्रदर्शन भड़काने का काम किया।

खामनेई का कड़ा बयान, ट्रंप पर आरोप

ईरान के सरकारी टीवी पर दिए गए अपने भाषण में खामनेई ने कहा कि दिसंबर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो गए और हजारों लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। खामनेई के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने की बात कही थी और यहां तक कहा था कि अमेरिका उन्हें हर तरह से मदद देगा।
खामनेई ने कहा कि जब कोई देश दूसरे देश में विद्रोह को उकसाता है, तो वहां होने वाली जान-माल की क्षति की जिम्मेदारी उसी की होती है। इसी आधार पर उन्होंने ट्रंप को ईरान में हुई मौतों का अपराधी बताया।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और फांसी का मुद्दा

वहीं दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में 800 से अधिक लोगों को दी जाने वाली फांसी रोके जाने पर संतोष जताया है। उन्होंने इसे मानवीय कदम बताया। ट्रंप का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते ईरान को पीछे हटना पड़ा।
हालांकि ईरान के भीतर कुछ कट्टरपंथी मौलवी अब भी प्रदर्शनकारियों के लिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश की शांति भंग करने वालों को फांसी दी जानी चाहिए। दूसरी तरफ, अमेरिका का रुख फिलहाल कुछ नरम नजर आ रहा है और वह सीधे टकराव से बचता दिख रहा है।

ईरान में फंसे भारतीय नाविक, भारत ने बढ़ाया दबाव

इसी बीच ईरान में हिरासत में लिए गए 16 भारतीय नाविकों का मामला भी सामने आया है। ये सभी एक तेल टैंकर पर काम कर रहे थे, जिसे ईरानी नौसेना ने रोक लिया था। भारत सरकार ने तेहरान से लगातार कांसुलर पहुंच देने की मांग की है, ताकि भारतीय अधिकारियों को नाविकों से मिलने की अनुमति मिल सके।
भारतीय दूतावास के अनुसार अब तक यह अनुमति नहीं मिली है, लेकिन नाविकों को पीने का पानी और जरूरी सुविधाएं ईरानी नौसेना की मदद से दी जा रही हैं। भारत ने यह भी आग्रह किया है कि नाविकों को अपने परिवार से संपर्क करने दिया जाए।

कुल मिलाकर ईरान में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। विरोध प्रदर्शन भले ही कुछ हद तक थम गए हों, लेकिन सियासी बयानबाजी, अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय मुद्दे लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं।