बरेली में सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों के सबसे बड़े धार्मिक केंद्र दरगाह आला हजरत से इस बार सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाला अहम फैसला सामने आया है। 108वें उर्स-ए-रजवी के दौरान लगने वाले लंगरों में इस बार मांसाहारी भोजन नहीं बनाया जाएगा। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) ने सभी लंगर कमेटियों से अपील की है कि वे केवल सात्विक और शाकाहारी भोजन ही श्रद्धालुओं को परोसें। उनका कहना है कि इस समय सावन का पवित्र महीना चल रहा है और पूरे बरेली में शिवभक्ति का माहौल है। ऐसे में सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है। दरगाह प्रबंधन का मानना है कि उर्स का मकसद मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देना है। इसलिए इस बार लंगरों में बिरयानी या किसी भी तरह के मांसाहारी पकवान की जगह पूरी, सब्जी, खिचड़ी, चावल, दाल और अन्य शाकाहारी व्यंजन तैयार किए जाएंगे। इस फैसले को शहर में गंगा-जमुनी तहजीब की एक अच्छी मिसाल माना जा रहा है।
सावन के चलते बदला गया उर्स का कार्यक्रम
6 अगस्त को परचम कुशाई के साथ उर्स-ए-रजवी की शुरुआत होगी। पहले कुल शरीफ 9 अगस्त को प्रस्तावित था, लेकिन सावन के अंतिम सोमवार को देखते हुए कार्यक्रम में बदलाव किया गया। दरगाह प्रबंधन का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर का माहौल सौहार्दपूर्ण बना रहे, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।इंतजामिया कमेटी के सदस्य नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह प्रमुख ने सभी लंगर कमेटियों को साफ निर्देश दिए हैं कि कहीं भी मांसाहारी लंगर न लगाया जाए। सभी स्थानों पर सिर्फ शाकाहारी भोजन ही वितरित किया जाए, ताकि हर धर्म और समुदाय के लोग बिना किसी संकोच के लंगर में शामिल हो सकें।
हर साल सैकड़ों लंगर लगते हैं, इस बार होगी नई शुरुआत
उर्स-ए-रजवी के दौरान इस्लामिया मैदान, मथुरापुर स्थित मदरसा जामियतुर्रजा समेत शहर के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा रजाकारों और सामाजिक संगठनों की ओर से सैकड़ों लंगर लगाए जाते हैं। अब तक अधिकतर लंगरों में बिरयानी और अन्य मांसाहारी भोजन बनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार परंपरा में बदलाव देखने को मिलेगा।दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने कहा कि सावन के महीने में सभी की आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उर्स का संदेश प्रेम, अमन और इंसानियत का है। इसलिए सभी लंगर कमेटियां ऐसा भोजन तैयार करें, जिससे समाज में भाईचारा और आपसी विश्वास और मजबूत हो। यही उर्स-ए-रजवी की असली पहचान भी है।
