राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला शुरू से आज तक क्या-क्या हुआ? पूरी कहानी जानिए, सिर्फ स्वाभिमान टीवी पर

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में हलचल मच गई। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ कर्मचारियों ने तय नियमों का पालन नहीं किया और इसी दौरान चढ़ावे में गड़बड़ी की गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को बनाया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि करीब 40 दिनों के दौरान कई बार चढ़ावे में कथित हेराफेरी की गई। हालांकि अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है और अदालत में आरोप साबित होना शेष है।

कितना पैसा मिला, किन पर हुई कार्रवाई?

अब तक की जांच में पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों ने इनके पास से करीब 80 लाख रुपये (करीब 8 मिलियन रुपये) बरामद करने का दावा किया है। वहीं, मंदिर ट्रस्ट ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए तथा नई व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा है कि कुल कितने रुपये की चोरी हुई। सोशल मीडिया और अलग-अलग मंचों पर कई तरह के आंकड़े सामने आए, लेकिन उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निश्चित रकम को अंतिम मानना सही नहीं होगा।

9 जुलाई को जांच में आया नया मोड़

गुरुवार, 9 जुलाई को एसआईटी की जांच में नया मोड़ आया। जांच में सामने आया कि मंदिर की अलग-अलग दान पेटियों (हुंडियों) का पैसा गिनती से पहले एक साथ मिला दिया जाता था। एसआईटी ने इसे बड़ी प्रक्रियागत खामी माना है, क्योंकि इससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाता था कि किस दान पेटी में कितना चढ़ावा आया। जांच टीम ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे पारदर्शिता की कमी बताया है। इसी दिन चंपत राय का एक पत्र भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कुछ जिम्मेदारी तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था पर डाली। इसके बाद एसआईटी ने इस पत्र को भी जांच का हिस्सा बना लिया है। फिलहाल एसआईटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक दस्तावेज, ड्यूटी रजिस्टर और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी राशि का गबन हुआ, किसकी क्या भूमिका रही और किन लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई होगी। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।