देखे सिर्फ स्वाभिमान टीवी पर दिल्ली के PG हादसे की पूरी इनसाइड स्टोरी, हादसे से अब तक क्या-क्या हुआ

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के हादसे ने सिर्फ सात लोगों की जान नहीं ली, बल्कि राजधानी में छात्रों के लिए चल रहे निजी PG और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को इमारत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है मलबे में छात्र और दूसरे लोग दब गए। इसके बाद करीब 27 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला और मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया। लेकिन सात लोगों की जान नहीं बच सकी।

हादसे के बाद मलबे में जिंदगी तलाशने की जंग

इमारत गिरते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दिल्ली पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुंची और इसके बाद दमकल, आपदा राहत टीमों और दूसरे बचाव दलों ने मोर्चा संभाला। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मलबा काफी ज्यादा था और आसपास की गलियां भी संकरी थीं। भारी मशीनों को मौके तक पहुंचाने और सुरक्षित तरीके से मलबा हटाने में काफी सावधानी बरतनी पड़ी। रेस्क्यू टीमों ने घंटों तक मलबा हटाया। एक-एक हिस्से को देखकर यह तलाश की गई कि कहीं कोई व्यक्ति दबा तो नहीं है। परिवारों के लिए सबसे मुश्किल वक्त वह था, जब उनके अपने लोग फोन पर संपर्क में नहीं थे और अस्पतालों में उनकी तलाश की जा रही थी। हादसे में जान गंवाने वालों में छात्र भी शामिल हैं। जिन माता पिता ने अपने बच्चों को अफसर बनने भेजा था अब उनका शव मिले

PG मालिक से लेकर MCD तक सवालों के घेरे में

हादसे के बाद जांच का दायरा सिर्फ PG मालिक तक सीमित नहीं रहा। इमारत की हालत, उसमें चल रहे काम और निर्माण नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़े काम की बात सामने आई है। यह भी जांच का विषय है कि इस काम से इमारत के स्ट्रक्चर पर कितना असर पड़ा। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। हादसे के बाद MCD के दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें इंजीनियर भी शामिल हैं। यानी कार्रवाई की आंच अब उन अफसरों तक पहुंच गई है, जिनकी जिम्मेदारी ऐसे भवनों की निगरानी और नियमों के पालन से जुड़ी होती है।

मालिक गिरफ्तार, परिवार पर भी कार्रवाई

पुलिस ने PG चलाने वाले मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने हरिराम और उनकी पत्नी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है, जबकि बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत में PG किस तरह चलाया जा रहा था और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
अब इस हादसे ने दिल्ली के दूसरे PG पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में छात्र कॉलेजों के आसपास निजी PG में रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कितनी इमारतें नियमों के मुताबिक हैं और कितनी सिर्फ कमाई के लिए इस्तेमाल हो रही हैं।
यही वजह है कि हादसे के बाद PG और ऐसी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग तेज हो गई है। दिल्ली में छात्र सुरक्षा और निजी आवास की व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन पर निगरानी बढ़ाने का दबाव है। दिल्ली का यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की कहानी नहीं है। यह सवाल है कि अगर पुरानी और कमजोर इमारतों की समय रहते जांच हो जाती, निर्माण पर नजर रखी जाती और PG में रहने वालों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती, तो क्या सात परिवार आज अपने अपनों को खोने से बच सकते थे? हादसे की जांच अब इसी सवाल का जवाब तलाश रही है।