वासुदेव से लेकर माधव तक… क्यों हैं भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम? हर नाम में छिपा है उनका अलग स्वरूप, जानिए स्वाभिमान टीवी पर

जन्माष्टमी का पर्व आते ही मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजने लगते हैं। भक्त कान्हा को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। कोई उन्हें कृष्ण कहता है, कोई गोपाल, कोई मुरलीधर तो कोई नंदलाल। भगवान श्रीकृष्ण के इन नामों का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, बल्कि हर नाम उनके जीवन, गुण, रूप और लीलाओं से जुड़ी एक अलग पहचान बताता है। हिंदू परंपरा में श्रीकृष्ण के 108 नामों का विशेष महत्व माना गया है।

हर नाम में कृष्ण के अलग रूप की झलक

श्रीकृष्ण के 108 नामों को अष्टोत्तरशतनामावली के रूप में भी जाना जाता है। इनमें उनके जन्म से लेकर बाल लीलाओं, गोपाल रूप, भक्तों के प्रति प्रेम और धर्म की स्थापना तक का वर्णन देखने को मिलता है। कृष्ण नाम का अर्थ है सांवले रंग वाले और सभी को अपनी ओर आकर्षित करने वाले। कमलनाथ उन्हें कहा जाता है, जिसका अर्थ कमल यानी लक्ष्मी के स्वामी से है। वासुदेव नाम उनके पिता वसुदेव से जुड़ा है, जबकि वसुदेवात्मज का अर्थ वसुदेव की आत्मा से उत्पन्न पुत्र बताया गया है। इसी तरह पुण्य नाम भगवान के पवित्र और पुण्य स्वरूप को दर्शाता है।लीलामानुषविग्रह का अर्थ है कि भगवान ने अपनी लीलाओं के लिए मनुष्य का रूप धारण किया। श्रीवत्सकौस्तुभधर नाम उनके उस स्वरूप को बताता है, जिसमें वे श्रीवत्स चिन्ह और कौस्तुभ मणि धारण करते हैं।

यशोदा के दुलारे से गोवर्धनधारी तक

कान्हा का बचपन भी उनके नामों में दिखाई देता है। यशोदावत्सल का अर्थ है माता यशोदा के दुलारे पुत्र। नवनीत विलिप्तांग यानी जिनके शरीर पर माखन लगा रहता था। माखन चोरी की बाल लीलाओं के कारण उन्हें नवनीत चोर और माखनचोर जैसे नामों से भी भक्त प्रेम से पुकारते हैं।भगवान कृष्ण का एक प्रसिद्ध नाम गोपाल है। इसका अर्थ है गायों का पालन करने वाला। इसी तरह गोविंद नाम भी उनके गोपाल रूप और इंद्रियों के स्वामी होने का संकेत देता है। जब ब्रजवासियों की रक्षा के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया तो वे गोवर्धनधारी और गिरिधारी के नाम से प्रसिद्ध हुए।
श्रीकृष्ण के कई नाम उनके पराक्रम को भी बताते हैं। पूतनाजीवितहर नाम पूतना के अंत से जुड़ा है, जबकि शकटासुरभंजन और धेनुकासुरभंजन उनके द्वारा असुरों के संहार की ओर संकेत करते हैं।

108 संख्या का भी है खास महत्व

हिंदू धर्म में 108 संख्या को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए इस्तेमाल होने वाली माला में सामान्य तौर पर 108 मनके होते हैं। इसी वजह से भगवान के नामों का जाप भी 108 बार करने की परंपरा रही है।श्रीकृष्ण के 108 नामों में माधव, केशव, मुरलीधर, मुरारी, दामोदर, जनार्दन, हृषीकेश, मुकुंद, पुरुषोत्तम, द्वारकाधीश और पार्थसारथी जैसे नाम भी शामिल हैं। हर नाम श्रीकृष्ण के किसी न किसी गुण, लीला या स्वरूप की याद दिलाता है। जन्माष्टमी पर जब भक्त भगवान के 108 नामों का जाप करते हैं तो यह केवल नामों का उच्चारण नहीं माना जाता, बल्कि उनके अलग-अलग स्वरूपों और लीलाओं का स्मरण भी होता है। यही वजह है कि कान्हा के 108 नाम आज भी भक्तों के बीच विशेष आस्था और श्रद्धा का विषय हैं।