नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद और शिक्षा सुधार के मुद्दों को उठाने वाले सोनम वांगचुक का आमरण अनशन मंगलवार, 8 जुलाई को 11वें दिन में पहुंच गया। लगातार भूख हड़ताल के चलते उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों की ओर से जारी ताजा स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार उनका वजन अब सात किलो से अधिक कम हो चुका है। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य से नीचे बने हुए हैं, इसलिए मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। धरना स्थल पर दिनभर छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राज्यों से पहुंचे समर्थकों की भीड़ जुटी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पुलिस भी पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं
डॉक्टरों के मुताबिक लगातार उपवास की वजह से सोनम वांगचुक के शरीर पर असर साफ दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य बुलेटिन में बताया गया है कि उनका वजन 59.40 किलोग्राम तक पहुंच गया है और उनकी शारीरिक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद वांगचुक ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की लड़ाई है। उनका आरोप है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं का भरोसा कमजोर किया है।
सरकार के जवाब का इंतजार, बढ़ रहा जनसमर्थन
धरना स्थल पर कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैंआंदोलनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि बढ़ते जनसमर्थन और सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत के बीच सरकार पर बातचीत शुरू करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहेंगे। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
