राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़ पूर्व लेखा प्रभारी ने SIT को भेजे 20 बिंदुओं वाले आरोप, ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज पर उठाए बड़े सवाल देखिए स्वाभिमान टीवी पर

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा मामला अब सिर्फ कथित चोरी की जांच तक सीमित नहीं रहा है। जांच के दौरान मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने विशेष जांच दल (SIT) को ई-मेल भेजकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2022 में भी कई अनियमितताओं की जानकारी अधिकारियों को दी थी, लेकिन उस समय उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने फिर से सभी दस्तावेज और करीब 20 बिंदुओं की शिकायत जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। महिपाल सिंह का कहना है कि 25 जुलाई को SIT की ओर से उनसे संपर्क किया गया था और उपलब्ध साक्ष्य मांगे गए थे। इसके बाद उन्होंने 27 जुलाई को ई-मेल के माध्यम से अपनी शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेज भेज दिए। उनका दावा है कि यदि सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

निर्माण, खर्च और दान की राशि को लेकर लगाए कई आरोप

पूर्व लेखा प्रभारी ने अपनी शिकायत में मंदिर परिसर से जुड़े निर्माण कार्यों और खर्च पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन कार्यों पर कम खर्च होना चाहिए था, वहां कहीं अधिक भुगतान किया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तीन एल्यूमिनियम-ग्लास केबिन की वास्तविक लागत करीब तीन लाख रुपये थी, लेकिन इनके लिए 17 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया। उनका यह भी दावा है कि अनुबंध की अवधि पूरी होने से पहले कार्यालय खाली कर दिए जाने से ट्रस्ट को आर्थिक नुकसान हुआ।महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ निर्माण कार्य ट्रस्ट के दायरे से बाहर होने के बावजूद ट्रस्ट के धन से कराए गए। उनका कहना है कि कई लोगों को बिना कार्य किए मानदेय दिया गया और अलग-अलग आयोजनों में भी ट्रस्ट की राशि खर्च की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मंदिर निर्माण के दौरान ठेकेदारों के भुगतान रोककर बाद में बढ़े हुए बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। साथ ही पत्थरों की खरीद और बिलों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दान और चढ़ावे से जुड़े मामलों में भी उन्होंने कई आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, दान में मिली कुछ ईंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। कैश काउंटिंग रूम से सोना और अन्य धातुएं बाहर ले जाने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि 150 किलो चांदी भेजे जाने के बावजूद केवल 85 किलो का झूला तैयार हुआ। इसके अलावा बिना रसीद धन लेने और उसमें गड़बड़ी होने की बात भी शिकायत में कही गई है।

कैश काउंटिंग, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रवेश पर भी उठाए सवाल

महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में कैश काउंटिंग प्रक्रिया को भी संदेह के घेरे में रखा है। उनका आरोप है कि नकदी की गिनती के दौरान गड्डियों की संख्या में हेराफेरी की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें कैश काउंटिंग की प्रक्रिया से अलग कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि बैंक में कम रकम के वाउचर भरवाकर धन के गबन की कोशिश की जाती थी।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि एक निजी व्यक्ति को पुलिस का वॉकी-टॉकी उपलब्ध कराया गया और उसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान भी प्रतिबंधित क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति मिली। इसके अलावा वीआईपी दर्शन, वाहन पास और सुरक्षा व्यवस्था में अनधिकृत हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए हैं।

महिपाल सिंह का कहना है कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों के नाम पर भी भुगतान किया गया, जो वास्तविक रूप से कोई काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दान में मिली निर्माण सामग्री के नाम पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान लिया गया। साथ ही उनका दावा है कि मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये थी, जबकि अब खर्च 2200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।पूर्व लेखा प्रभारी ने यह भी कहा कि वह ट्रस्ट में बिना किसी वेतन के सेवा दे रहे थे और कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जानकारी सामने लाने के बाद उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जून 2026 में चढ़ावे से जुड़े मामले की जानकारी मिलने के बाद बाद में पूरे घटनाक्रम को अलग तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।

फिलहाल, ये सभी आरोप महिपाल सिंह की शिकायत का हिस्सा हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता और किसी भी तरह की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।