नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार जारी है। धरना शुरू होने के बाद से हर दिन आंदोलन को समर्थन देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और कई संगठनों के लोग जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। वहीं अनशन लंबा खिंचने से उनकी सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और समर्थक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। धरना शुरू होने के पहले दिन सोनम वांगचुक ने कहा था कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार सामने आने वाली परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। इसी वजह से उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अनशन शुरू किया।अनशन शुरू होने के बाद हर दिन जंतर-मंतर पर लोगों की भीड़ बढ़ती गई। कई छात्र संगठनों ने खुलकर समर्थन दिया। अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जरूरी है। कई शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने भी मंच पर पहुंचकर अपनी बात रखी। किसान संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर एकजुटता दिखाई और आंदोलन का समर्थन किया।
सेहत पर पड़ा असर, डॉक्टरों की टीम कर रही लगातार जांच
लंबे समय से भोजन न लेने की वजह से सोनम वांगचुक की सेहत पर असर साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य जांच में उनका वजन करीब छह किलो तक कम होने की जानकारी सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर भी पहले की तुलना में नीचे आया है। हालांकि मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और समय-समय पर जरूरी जांच की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक अनशन करने से शरीर कमजोर होना स्वाभाविक है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही। धरना स्थल पर मौजूद समर्थकों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में शामिल लोग लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। सोनम वांगचुक भी अपने समर्थकों से बार-बार शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सबसे मजबूत तरीका शांतिपूर्ण आंदोलन ही है।आंदोलन से जुड़े लोगों की मांग है कि देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए। पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य किसी भी कीमत पर खराब नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि ऐसी व्यवस्था बने, जिससे छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।धरना शुरू होने के बाद से पुलिस और प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जंतर-मंतर पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। अब तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत कब शुरू होती है और मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। उधर सोनम वांगचुक ने साफ कहा है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। धरना शुरू होने से लेकर आज तक की हर बड़ी अपडेट पर सभी की नजर बनी हुई है।
