मोबाइल चोरी के शक में बिहार के मौलाना को ट्रेन से फेंककर दी थी मौत, 40 दिन बाद GRP ने 10 हजार के इनामी आरोपी को किया गिरफ्तार

बरेली में ताजुश्शरिया उर्स से लौट रहे बिहार के मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी की मौत के मामले में जीआरपी ने बड़ा खुलासा किया है। करीब 40 दिन तक चली जांच के बाद पुलिस ने मुरादाबाद निवासी पंकज राजपूत को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि मोबाइल चोरी के शक में हुए विवाद के दौरान आरोपी ने मौलाना के साथ मारपीट की थी, जिसके बाद वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गए और उनकी मौत हो गई।

दरअसल पूरा मामला 26 अप्रैल का है। बिहार के किशनगंज निवासी मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी बरेली में आयोजित ताजुश्शरिया उर्स में शामिल होने आए थे। उर्स समाप्त होने के बाद वह ट्रेन से वापस अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान ट्रेन में उनके साथ यह घटना हुई थी। मामले ने उस समय काफी तूल पकड़ा था और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी।

200 यात्रियों से पूछताछ और 300 से ज्यादा CCTV फुटेज की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी ने बड़े स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन के कई कोचों में सफर कर रहे करीब 200 यात्रियों से पूछताछ की। इसके साथ ही 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और सैकड़ों मोबाइल नंबरों की जांच की गई।जांच के दौरान पुलिस को कुछ वीडियो क्लिप भी मिले, जिनमें ट्रेन के अंदर हुए विवाद की जानकारी सामने आई। यात्रियों ने भी पुलिस को बताया कि एक युवक मौलाना के साथ मारपीट कर रहा था। इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। पुलिस पूछताछ में आरोपी पंकज राजपूत ने बताया कि यात्रा के दौरान उसे अपना मोबाइल फोन गायब होने का शक हुआ था। उसे लगा कि मोबाइल मौलाना ने लिया है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ और फिर मारपीट हो गई। आरोपी का कहना है कि उसका हत्या करने का इरादा नहीं था, लेकिन धक्का लगने से मौलाना ट्रेन से नीचे गिर गए।

खुलासे से संतुष्ट नहीं हैं मौलाना की पत्नी

मामले के खुलासे की सूचना मिलने पर मौलाना की पत्नी तबस्सुम बिहार से बरेली पहुंचीं और जीआरपी अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने पुलिस की जांच की सराहना की, लेकिन खुलासे पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई। उनका कहना है कि इतनी बड़ी घटना में सिर्फ एक व्यक्ति के शामिल होने की बात उन्हें स्वीकार नहीं है।तबस्सुम ने कहा कि उनकी शादी को अभी एक साल ही हुआ था और इस घटना ने उनका परिवार उजाड़ दिया। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता और नौकरी देने की मांग भी की। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिली है।

वहीं जीआरपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार वर्मा का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों, यात्रियों के बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है और पुलिस का दावा है कि मामले की सभी अहम कड़ियां स्पष्ट हो चुकी हैं।