पश्चिम एशिया से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ था, अब वो खतरे में नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कभी भी तनाव फिर बढ़ सकता है। सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है होरमुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल जाता है।
होरमुज में फिर बढ़ी टेंशन, जहाजों पर असर
जानकारी के मुताबिक, होरमुज स्ट्रेट में हालात काफी बिगड़ गए हैं। पहले कहा गया था कि रास्ता खुला है, लेकिन अब जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। पहले जहां रोज 100 से ज्यादा जहाज निकलते थे, अब गिने-चुने जहाज ही जा पा रहे हैं। अमेरिका ने यहां सख्ती बढ़ा दी है और ईरान के जहाजों को रोकने की कार्रवाई भी की है। हाल ही में एक ईरानी जहाज को अमेरिकी सेना ने रोक लिया, जिस पर ईरान ने कड़ा विरोध जताया और इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया। इस पूरे मामले से माहौल और ज्यादा खराब हो गया है। कई जहाज बीच रास्ते से ही वापस लौट रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं हमला न हो जाए।
सीजफायर खत्म होने का खतरा, बातचीत भी अटकी
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को दो हफ्ते का सीजफायर हुआ था, लेकिन अब वो खत्म होने के करीब है। दोनों देशों के बीच बातचीत होनी थी, लेकिन अब उस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने कहा है कि अमेरिका भरोसे लायक नहीं है और उसने बातचीत में हिस्सा लेने पर अभी फैसला नहीं किया है। दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि जब तक समझौता नहीं होगा, तब तक वो अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। इस वजह से दोनों देशों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है।
दुनिया पर असर, तेल के दाम भी प्रभावित
होरमुज दुनिया का सबसे अहम तेल रास्ता है। यहां से करीब 20% तेल सप्लाई होती है। अगर यहां समस्या बढ़ती है तो पूरी दुनिया पर असर पड़ता है। अभी हालात ऐसे हैं कि तेल की सप्लाई पर खतरा बना हुआ है। अगर तनाव बढ़ा तो तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जहां तेल का बड़ा हिस्सा बाहर से आता है।
आगे क्या हो सकता है
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत से मामला सुलझाएंगे या फिर तनाव और बढ़ेगा। अगर सीजफायर खत्म हुआ तो हालात और खराब हो सकते हैं।फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है और दुनिया भर के देश इसे लेकर चिंता में हैं।
